ईद-मिलाद-उन-नबी, निकला भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी

पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश (ईद-मिलाद-उन-नबी) का त्योहार बुधवार को सीतापुर शहर में अकीदत, कौमी एकता

रामनाथ रावत

सीतापुर। पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश (ईद-मिलाद-उन-नबी) का त्योहार बुधवार को सीतापुर शहर में अकीदत, कौमी एकता और बेहद अदब व एहतराम के साथ मनाया गया।

पूरा शहर नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर और ‘सरकार की आमद मरहबा’ के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। त्योहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा गया। अकीदतमंदों ने अपने घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों को खूबसूरत रंग-बिरंगी लाइटों, बिजली की झालरों और इस्लामी झंडों से सजाया था।

सजावटी गेट

शहर के प्रमुख चौराहों और रास्तों पर भव्य सजावटी गेट बनाए गए थे। आकर्षक रोशनी के चलते पूरा पुराना इलाका दुल्हन की तरह चमचमा रहा था। नमाज़ संपन्न होने के बाद सबसे पहले कल्लू पहलवान के आवास पर अकीदत के साथ फातिहाख्वानी की गई, जहां मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए मन्नतें मांगी गईं।

इसके बाद मरकज़ी कमेटी जुलूस-ए-मोहम्मदी के सदर हाजी मुजीब अहमद और जनरल सेक्रेटरी के इकबाल अहमद के नेतृत्व में पक्के पुल से विशाल जुलूस का आगाज़ हुआ। जुलूस अपने पारंपरिक और पूर्व निर्धारित रास्तों से होकर गुज़रा।

सैकड़ों अंजुमनों के उलेमा और अकीदतमंदों

इसमें शामिल सैकड़ों अंजुमनों के उलेमा और अकीदतमंदों ने पूरी शिद्दत के साथ हज़रत मोहम्मद साहब की शान में नातें पढ़ीं। जुलूस में छोटे बच्चे हाथों में इस्लामी परचम थामे बेहद उत्साहित नजर आए, वहीं युवाओं का जोश भी देखने लायक था।

जुलूस में सजे-धजे ऊंट, घोड़े और रंग-बिरंगी लाइटों से सजे दोपहिया व चार पहिया वाहन लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सौहार्द और भाईचारे के बीच शहरवासियों ने रास्तों में जगह-जगह खाने-पीने की चीज़ों और ठंडे पानी की सबीलें लगाईं। स्थानीय लोगों ने जुलूस का ज़ोरदार इस्तकबाल किया और अंजुमनों व कमेटी के पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।

अपने तय रास्तों से होता हुआ यह जुलूस देर शाम कज़ियारे चौराहे पर पहुंचा, जहां यह एक विशाल जलसे में तब्दील हो गया। जलसे के आख़िर में उलेमा-ए-किराम ने देश में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ कराई, जिसके बाद शांतिपूर्ण ढंग से कार्यक्रम संपन्न हुआ।
जुलूस के दौरान मरकज़ी कमेटी के सरपरस्त मुन्ना पहलवान, कारी सलाहुद्दीन, अकील अहमद, मो. इम्तियाज़ ख़ान, अब्दुल कय्यूम अंसारी, मो. शमीम खान शानू, आफताब इक़बाल, यासीन इब्ने उमर, आफताब अंसारी, शमीम बेग, नूरुल हक़, अयाज़ अहमद शानू, उरुज बुनियाद, मो. नबी मोल्हे, मो. सलीम अड्डू,

अकीलुर रहमान अंसारी, मोईन ख़ान, मो. काशिफ, एहराज बेग बब्बू, शाहनवाज़ अंसारी, निहाल, पप्पू अंसारी, रियाज़ अंसारी जिब्बू, मोअज्जम अहमद मोनू, फुरक़ान अंसारी, मुमताज़ बेग, ज़ीशान मिर्ज़ा, कारी असद, ज़फर आलम, तलहा जफ़र और मो. नईम सहित अन्य तमाम मेम्बरान व अकीदतमंद मौजूद रहे।

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