
रामनाथ रावत
सीतापुर। इंसान के जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जब वह समाज के बनाए विचारों को छोड़ कुछ अलग करने की ठान लेता है।
ऐसा ही एक मार्मिक मामला स्थानीय नगर के कुरैशी मार्ग से सामने आया है, जहां एक बहन ने अपने भाई की अंतिम यात्रा में अग्नि देकर समाज की सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं को पीछे छोड़ दिया और एक नई मिसाल कायम की।
मिली जानकारी के अनुसार, कुरैशी मार्ग निवासी लालू पटवा (55 वर्ष), पुत्र रामकिशन पटवा, महमूदाबाद नगर में ही एक छोटी सी दुकान चलाकर अपना जीवन यापन करते थे। कुछ वर्ष पूर्व उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद से वह घर में पूरी तरह अकेले रहते थे।
वह अपने माता-पिता की इकलौती पुरुष संतान थे और उनका कोई बेटा या भाई नहीं था। पिछले कुछ समय से वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उनका निधन हो गया। भाई की मृत्यु के बाद सबसे बड़ा संकट अंतिम संस्कार को लेकर खड़ा हो गया, क्योंकि घर में रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए कोई भी पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। ऐसे भावुक और कठिन समय में समाज के तानों और पुरानी रूढ़ियों की परवाह न करते हुए उनकी 60 वर्षीय बड़ी बहन विमला देवी आगे आईं।
उन्होंने भाई के प्रति अपने प्रेम और कर्तव्यों को सर्वोपरि रखा। विमला देवी ने शव यात्रा से लेकर अंतिम संस्कार तक की सभी रस्में खुद पूरी कीं। इसके बाद रमुआपुर स्थित मुक्तिधाम में पूरी विधि-विधान के साथ भाई लालू पटवा की चिता को मुखाग्नि दी। एक बहन के इस अदम्य साहस, हिम्मत और समर्पण को देखकर श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
वहां मौजूद लोगों ने कहा कि विमला देवी ने साबित कर दिया है कि संकट के समय बहनें भी बेटों और भाइयों से कम नहीं होतीं। इस दुखद घड़ी में मनोज श्रीवास्तव, अशोक नाग, देशराज, दिनेश, संजय, राजेश, मुशीर और दीपक सहित कई संभ्रांत नागरिकों ने मुक्तिधाम पहुंचकर मृतक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त बहन को ढांढस बंधाया।





