
रामनाथ रावत
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की एक विशेष अदालत ने बुधवार को अटरिया थाना क्षेत्र में वर्ष 1992 में हुए बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड और गैंगस्टर एक्ट के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट (कोर्ट संख्या-05) ने मामले के चार आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 1.17 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह आपराधिक मामला साल 1992 का है, जब अटरिया क्षेत्र के मनवा गांव की एक मस्जिद में लोग नमाज अदा कर रहे थे। इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर आरोपी जलील, रफात अली उर्फ रफ्फू, प्यारे लाल और नसीर ने मस्जिद के भीतर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी।
इस भीषण हमले में अफाक, सलामत और मौलाना जुबैर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लगभग 34 वर्षों तक चले इस लंबे कानूनी ट्रायल के दौरान अटरिया पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। गवाहों और साक्ष्यों को मजबूती से पेश किए जाने के बाद आखिरकार कोर्ट ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाकर पीड़ितों को न्याय दिया।





