
लखनऊ। उत्तर प्रदेश एवं बिहार राज्य की जनता को दोनों प्रदेशों के मध्य आवागमन की सुविधा को सुदृढ़ किए जाने के दृष्टिगत परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह एवं बिहार सरकार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत के मध्य महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक में चर्चा के प्रमुख बिन्दु
1. उत्तर प्रदेश एवं बिहार के मध्य वर्ष 2016 से प्रभावी अन्तर्राज्यीय परिवहन करार, जिसे माह मई, 2026 में विस्तारित किया गया है, में उल्लिखित 25 मार्गों पर संचालन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।
2. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा बिहार राज्य के अन्य जनपदों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों हेतु बस सेवा प्रदान किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
3. मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 88 के अन्तर्गत अन्तर्राज्यीय मार्गों पर स्टेज कैरिज बसों के संचालन के सम्बन्ध में निर्धारित व्यवस्था के आलोक में प्रस्तावित मार्गों पर संचालन के सम्बन्ध में दोनों राज्यों के परिवहन विभाग एवं परिवहन निगम के अधिकारियों द्वारा विचार-विमर्श किया गया।
सहमति एवं निर्णय
1. प्रस्तावित मार्गों पर संचालन के सम्बन्ध में दोनों राज्यों के परिवहन निगम एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा परस्पर विचार-विमर्श कर अग्रेतर कार्यवाही किए जाने पर सहमति बनी।
2. बिहार राज्य द्वारा अवगत कराया गया कि अनुरोध किए गए समस्त मार्गों का मानचित्र सहित विवरण शीघ्र उपलब्ध करा दिया जाएगा।
3. इस अवधि में दोनों प्रदेशों में नवीन हाईवेज का निर्माण हुआ है, जिन्हें बस सेवा से आच्छादित किए जाने के दृष्टिगत नवीन मार्गों का निर्धारण किए जाने हेतु आधिकारिक रूप से शीघ्र ही द्वितीय चरण की बैठक आहूत की जाएगी।
4. बिहार राज्य की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि बिहार राज्य में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा अथवा असुविधा उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।
5. दोनों राज्यों की जनता को, विशेष रूप से दोनों राज्यों के सीमावर्ती जनपदों में, बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु आपसी सहयोग पर बल दिया गया।
6. दोनों राज्यों की बसों में किराये के निर्धारण में एकरूपता लाए जाने पर सहमति व्यक्त की गई।
7. नवीन मार्गों का पुनः परीक्षण कर समतुल्य किलोमीटर के आधार पर समझौता किए जाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।
अग्रेतर कार्यवाही
1. बिहार राज्य से अनुरोधित मार्गों का मानचित्र सहित विवरण प्राप्त किया जाना।
2. प्राप्त विवरण का परीक्षण कर मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 88 के प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित किया जाना।
3. नवनिर्मित हाईवेज पर आधारित नवीन मार्गों के निर्धारण हेतु द्वितीय चरण की बैठक की तिथि नियत किया जाना।
4. किराया निर्धारण में एकरूपता तथा समतुल्य किलोमीटर आधारित करार के प्रारूप पर दोनों राज्यों के स्तर से कार्यवाही किया जाना।





