सिधौली एसडीएम पर विधायक के दबाव में काम करने का संगीन आरोप

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की शिकायत

रामनाथ रावत

सीतापुर।उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की सिधौली तहसील से सत्ता के रसूख और प्रशासनिक दबाव का एक कथित मामला सामने आया है।

अटरिया ग्राम सभा के आधा दर्जन स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सीतापुर को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय विधायक के दबाव में उनकी दुकानें और भूखंड छीनने की कोशिश की जा रही है।

पीड़ितों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो उनके सामने रोज़ी-रोटी और जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम अटरिया (परगना मनवा, तहसील सिधौली) के अशोक कुमार मिश्रा, महादेव प्रसाद विश्वकर्मा, सतीश कुमार, बिंद्रा प्रसाद, रामनरेश, सुंदर और दयाराम रावत ने करीब 10 से 12 वर्ष पूर्व नेशनल हाईवे-24 पर स्थित गाटा संख्या 945 से जमीन खरीदी थी।

इस जमीन पर पीड़ित पिछले 10 वर्षों से अपनी दुकानें और बाउंड्रीवाल बनाकर व्यापार कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गाटा संख्या 945 का जो हिस्सा पीछे खाली बचा हुआ था, उसे सिधौली के वर्तमान विधायक मनीष रावत के सगे बड़े भाई आदित्य प्रकाश ने बीते 10 सितंबर 2025 को बैनामा कराया है।

पीड़ितों के मुताबिक, विधायक के भाई की जमीन तक आने-जाने के लिए मौके पर पहले से ही दो रास्ते उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, कथित तौर पर मुख्य जी.टी. रोड पर स्थित गरीबों की दुकानों और बाउंड्री को हटवाकर वहां विधायक के भाई का हिस्सा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिकायत पत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उपजिलाधिकारी सिधौली, विधायक के राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।

आरोप है कि एसडीएम महोदय विधायक की मर्जी के मुताबिक ही उक्त गाटा संख्या का ‘कुर्रा बंटवारा’ कराना चाहते हैं। इसके लिए कथित रूप से हलका लेखपाल पर भी प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से नाजायज दबाव बनाया जा रहा है।

दुकानदारों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए कहा है कि वे बेहद गरीब हैं। अगर सत्ता के रसूख के बल पर उनकी दुकानें तोड़ी या हटाई गईं, तो उनका धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा।

पीड़ितों ने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेने और विधायक व उनके करीबियों द्वारा जमीन को कथित रूप से हड़पने के प्रयास से बचाने की मांग की है। इस मामले में अभी तक स्थानीय प्रशासन या विधायक पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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