
रामनाथ रावत
सीतापुर। नवीन चौक, बाईपास स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल (एलपीएस) में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित गरीब और मेधावी बच्चों को प्रवेश न देने का गंभीर मामला सामने आया है।
अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी राजा गणपति आर. ने सख्त रुख अपनाया है। विद्यालय प्रशासन की इस मनमानी को रोकने के लिए डीएम ने तत्काल प्रभाव से एक त्रि-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
डीएम के इस कड़े कदम से जिले के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच समिति को अगले 20 कार्यदिवसों के भीतर अपनी स्पष्ट संस्तुतियों के साथ विस्तृत आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि आरटीई कानून के तहत पात्र और वंचित वर्ग के बच्चों को दाखिला देना हर मान्यता प्राप्त निजी स्कूल का कानूनी कर्तव्य है। इससे कोई भी संस्थान पीछे नहीं हट सकता। उन्होंने साफ किया कि यदि जांच में लखनऊ पब्लिक स्कूल द्वारा नियमों के उल्लंघन या गरीब बच्चों के प्रवेश में जानबूझकर रोड़ा अटकाने की पुष्टि होती है, तो प्रबंधन को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
अन्य स्कूलों को भी कड़ा संदेश
डीएम ने कहा कि आरटीई के नियमों की अनदेखी करने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने समेत कठोरतम विधिसम्मत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस कार्रवाई का मकसद बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अन्य शिक्षण संस्थानों को भी एक कड़ा संदेश देना है, ताकि जिले में शिक्षा के अधिकार कानून का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया जा सके।





