
लखनऊ। आशियाना जैन मंदिर में चल रहे चातुर्मास वर्षायोग के अंतर्गत “राष्ट्रहित पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन राजलक्ष्मी रेस्टोरेंट के बैंक्वेट हॉल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में शरू हुआ।
इस अवसर पर अपने प्रेरणादायी प्रवचन में पूज्य उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज ने कहा कि जैन समाज केवल व्यापार करने वाला समाज नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समाज है। जैन समाज अपने बच्चों को शिक्षा, संस्कार, सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। समाज के लोग उद्योग, व्यापार, शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, न्याय और सामाजिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, रोजगार सृजन करने तथा करों के माध्यम से राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों, संस्कारों तथा युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करे तथा भावी पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान की जाए।
राष्ट्रहित विषय पर आयोजित इस विशेष संगोष्ठी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जैन समाज के गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया।
सम्मानित होने वालों में मुख्य रूप से शुभम जैन (जॉइंट डायरेक्टर, वित्त एवं उद्योग विभाग), शुभ्रा जैन (असिस्टेंट प्रोफेसर, ट्रिपल आईआईटी), ए. के. जैन (पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश पुलिस), विपिन जैन (चार्टर्ड अकाउंटेंट), कैलाश चंद्र जैन सर्राफ (अध्यक्ष, सर्राफा एसोसिएशन एवं चंदा रानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट), शैलेन्द्र जैन (मेंबर, गवर्निंग काउंसिल ऑफ एसएमई), वी. के. जैन (सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिरीक्षक, कारागार विभाग, उत्तर प्रदेश), आशीष कुमार जैन (डिप्टी चीफ लीगल डिफेंस काउंसिल) तथा जे. के. जैन (अधिवक्ता) सहित अनेक विशिष्ट जन शामिल रहे।




