राजस्थान क्लस्टर गठन में देश में दूसरा और किसान पंजीकरण में तीसरा स्थान

प्राकृतिक खेती में राजस्थान की बड़ी छलांग

रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन

जयपुर,। राजस्थान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत क्लस्टर गठन में देश में दूसरा तथा किसान पंजीकरण में तीसरा स्थान हासिल किया है।

प्रदेश में अब तक 2,380 क्लस्टर गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 2 लाख 12 हजार 346 किसान जुड़े हैं। वहीं, करीब 91 हजार 166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाई जा चुकी है।

राज्य सरकार का लक्ष्य ढाई लाख किसानों को जोड़ते हुए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2025-26 तक लगभग 49.97 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

ऑर्गेनिक फूड मार्केट विकसित

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत 50 हजार किसानों को जैविक खाद उत्पादन के लिए 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। साथ ही जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट विकसित किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर बाजार मिल सके। बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

बजट 2025-26 में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग स्थापित करने की घोषणा की गई है, जो प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 25 नवंबर 2024 से लागू है। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। मिशन के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 4 हजार रुपये की सहायता दो वर्षों तक प्रदान कर रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, जबकि करीब 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी दर्ज की गई है। साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें स्थानीय संसाधनों, देशी गाय आधारित जैविक घोल, मल्चिंग और मिश्रित खेती का उपयोग कर रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जाती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और किसानों को कम लागत में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है।

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