रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन
जयपुर। महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों, नए शोध और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श के उद्देश्य से शुक्रवार को 10वीं वार्षिक राष्ट्रीय महिला मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी आयोजित की गई।
इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के वूमेन मेंटल हेल्थ स्पेशियलिटी सेक्शन, रिसर्च एजुकेशन एंड सर्विस ट्रस्ट (REAST) तथा गौतम अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में होटल गोल्डन ट्यूलिप में आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से मनोचिकित्सक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सा विद्यार्थी शामिल हुए।
इस वर्ष संगोष्ठी की थीम “Invisible Burdens, Visible Strengths: Redefining Women’s Mental Health” रही। विशेषज्ञों ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन समस्याओं पर विशेष चर्चा की, जो अक्सर अनदेखी रह जाती हैं, साथ ही उनके वैज्ञानिक समाधान और प्रभावी उपचार पर विचार साझा किए।
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में डिजिटल युग का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, किशोरावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति तक महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में आने वाले बदलाव, दीर्घकालिक दर्द, सहायक प्रजनन तकनीक, यौन स्वास्थ्य, ट्रॉमा, माइंडफुलनेस, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य तथा कार्यक्षेत्र में सफल महिलाओं पर बढ़ते मानसिक दबाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नवीन शोध और अनुभव प्रस्तुत किए गए।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अनीता गौतम ने “महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में यौन स्वास्थ्य का समावेश : चुनौतियां और अवसर” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि महिलाओं के समग्र मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए यौन स्वास्थ्य पर खुली चर्चा, जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श और उचित उपचार मिलने पर महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश मानसिक समस्याओं का समय पर पहचान, परिवार के सहयोग, उचित परामर्श और वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से सफलतापूर्वक समाधान किया जा सकता है। साथ ही मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों और कलंक को दूर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने महिलाओं के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम, योग एवं ध्यान, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, परिवार और मित्रों के साथ संवाद बनाए रखने तथा सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि तनाव, अवसाद, चिंता, अनिद्रा या व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहें, तो बिना संकोच मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान शोध पत्रों की प्रस्तुति, पोस्टर प्रतियोगिता, कार्यशालाएं और पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें महिलाओं तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और संवेदनशील बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।





