इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज में ‘अधिकृत नियंत्रक’ की नियुक्ति पर लगाई रोक

सीतापुर के श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज में 'अधिकृत नियंत्रक' नियुक्त करने के माध्यमिक शिक्षा विभाग के आदेश पर

रामनाथ रावत

सीतापुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सीतापुर के श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज में ‘अधिकृत नियंत्रक’ नियुक्त करने के माध्यमिक शिक्षा विभाग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

कोर्ट ने इस मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने सी/एम श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, सीतापुर एवं अन्य (प्रबंधक डॉ. कमल कुमार जैन के माध्यम से) द्वारा दायर रिट याचिका संख्या 8041/2026 पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा और उनकी टीम ने दलील दी कि माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा 23 जून, 2026 को जारी किया गया विवादित आदेश पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विभाग ने प्रबंधन द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना, उसे केवल आदेश में दोहरा दिया और जवाब को खारिज करने का कोई ठोस कानूनी कारण नहीं बताया। यह प्रशासनिक स्तर पर ‘विवेक का इस्तेमाल न करने’ को साफ दर्शाता है।

शासनादेश का उल्लंघन और बासी आरोपों का हवाला

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को ‘अधिकृत नियंत्रक’ नियुक्त करना पूरी तरह गैरकानूनी है, क्योंकि शासनादेश दिनांक 3 जनवरी 2017 स्पष्ट रूप से किसी भी सहायता प्राप्त संस्थान में ऐसी नियुक्ति पर रोक लगाता है। इसके अलावा, प्रबंधन के खिलाफ की गई यह कार्रवाई बेहद पुराने और बासी आरोपों पर आधारित है, जो कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अपनी दलीलों के समर्थन में याचिकाकर्ता पक्ष ने ‘गोवर्धन ट्रांसफार्मर’ और ‘पिडिलाइट इंडस्ट्रीज’ जैसे कई महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का हवाला भी दिया। वहीं, प्रतिवादी उत्तर प्रदेश राज्य (माध्यमिक शिक्षा विभाग) की ओर से स्थायी अधिवक्ता और कैविएटर की तरफ से अधिवक्ता नीरज कुमार मिश्रा ने सरकार का पक्ष रखा।

कोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने 23 जून, 2026 के विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा और मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर, 2026 को तय की गई है।

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