कर्म ही किस्मत की रेखाएँ बनाते हैं : उपाध्याय श्री विहेसंत सागर जी महाराज

जैन दिगंबर संत पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज का चातुर्मास

लखनऊ। जैन दिगंबर संत पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज का चातुर्मास के दौरान आज प्रातः चौक स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूज्य गुरुवर का स्वागत किया। मंदिर में आयोजित मंगल प्रवचन में गुरुवर ने कर्म, भाग्य और पुरुषार्थ के महत्व पर प्रकाश डाला।

उपाध्याय श्री ने कहा कि कर्म ही किस्मत की रेखाएँ बनाते हैं और सत्कर्म जीवन को नया आकार देते हैं। भाग्य कोई स्थिर लेख नहीं, बल्कि कर्मों की वह धारा है, जो हमारे निर्णयों और प्रयासों से निरंतर बदलती रहती है। अच्छे कर्मों की रोशनी जीवन के अंधकार को मिटाकर सही दिशा दिखाती है। जो व्यक्ति अपने कर्मों को सुधार लेता है, वह अपनी किस्मत को भी संवार लेता है।

उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के जीवन से भ्रम दूर हो जाते हैं और सत्कर्मों की रोशनी से जीवन का पथ प्रकाशित हो उठता है।

इस अवसर पर अजय जैन, अशोक जैन, सचिन जैन, सिद्धार्थ जैन, शरद जैन, संजीव जैन, राजीव जैन, संदीप जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कल प्रातः इंद्रानगर जैन मंदिर जाएंगे गुरुवर कल प्रातः पूज्य गुरुवर चौक से पदयात्रा करते हुए इंद्रानगर जैन मंदिर पहुंचेंगे, जहां उनके मंगल प्रवचन होंगे।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
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