ज्ञान का दीपक है सरस्वती महाअर्चना-उपाध्याय श्री 108 विहेसंत सागर जी महाराज

उपाध्याय श्री 108 विहेसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में 26वें वर्ष में प्रवेश कर रही सरस्वती आराधना

लखनऊ। भगवान की पूजा-अर्चना तो सभी करते हैं, लेकिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की आराधना करने वाले अपेक्षाकृत कम हैं। माँ सरस्वती ज्ञान का वह दीपक हैं, जो जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर विवेक, बुद्धि और संस्कारों के प्रकाश की ओर ले जाता है।

इसी उद्देश्य के साथ उपाध्याय श्री 108 विहेसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में सरस्वती महाअर्चना का भव्य आयोजन किया गया। यह सरस्वती आराधना का 26वाँ वर्ष है। पूज्य उपाध्याय श्री पिछले 25 वर्षों से निरंतर माँ सरस्वती की आराधना करते आ रहे हैं।

पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज माँ सरस्वती के अनन्य उपासक हैं। उनके जीवन में माँ सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व रहा है। उनकी दीक्षा के समय भी माँ सरस्वती से जुड़ा विशेष संयोग रहा था, जो उनकी आध्यात्मिक साधना में इस आराधना की महत्ता को दर्शाता है।

बताया जाता है कि लगभग 1200 वर्ष प्राचीन माँ सरस्वती की प्रतिमा उत्तर प्रदेश के इटावा के पास स्थित हँसेही गाँव में भूगर्भ से प्राप्त हुई थी। वहाँ खुदाई के दौरान लगभग साढ़े तीन हजार प्रतिमाएँ खंडित अवस्था में मिली थीं, जिनमें से केवल पाँच प्रतिमाएँ साबुत प्राप्त हुईं। इन्हीं में माँ सरस्वती की एक प्रतिमा पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज को प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने सरस्वती आराधना को व्यापक स्वरूप प्रदान करते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाया। आज यह आराधना अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर रही है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य अतिथि श्री अमनीश अवस्थी ने सहभागिता कर माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं, इंदौर से पधारे श्रीमती सपना एवं श्री मनीष जैन ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। आयोजन में बाबू कैलाश चंद्र जैन ने मंच का उद्घाटन किया, जबकि श्रीमती कुशम एवं अभिषा ने दीप प्रज्वलन किया।

धार्मिक अनुष्ठान में विभिन्न पात्रों ने अपनी भूमिका निभाई। सौधर्म इंद्र के रूप में संजय जैन एवं श्रीमती मीना जैन ने सहभागिता की। कुबेर के रूप में अमृत जैन एवं शिखा जैन का नाम रहा। चक्रवर्ती के रूप में विकास जैन परिवार ने सहभागिता की, जबकि महायज्ञनायक के रूप में निर्मल जैन एवं श्रीमती छाया जैन ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। कार्यक्रम में श्रीमती आशु जैन, नीरज जैन तथा डॉ. वैभव जैन एवं डॉ. गुंजन जैन सहित अन्य गणमान्य जनों की उपस्थिति रही।

मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि सरस्वती महाअर्चना में महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं जिलों से श्रद्धालु पहुंचे। इस धार्मिक आयोजन में लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने सहभागिता दर्ज कराई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ माँ सरस्वती की आराधना की।

आयोजकों के अनुसार, माँ सरस्वती की आराधना से व्यक्ति की इच्छाशक्ति मजबूत करने, एकाग्रता बढ़ाने और बुद्धि के विकास के लिए प्रेरणा मिलती है। आयोजन का उद्देश्य बच्चों, युवाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग में ज्ञान, संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। रविवार सुबह 11 बजे ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सरस्वती महाअर्चना ने ज्ञान, विवेक और संस्कारों की ज्योति जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
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