नदी को ‘नाला’ बताकर बसा दी केशव ग्रीन सिटी,मुकेश अग्रवाल सहित आधा दर्जन भूमाफियाओं पर मुकदमा दर्ज

जिला प्रशासन ने नदी की जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी बसाकर सैकड़ों

रामनाथ रावत

सीतापुर। जिला प्रशासन ने नदी की जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी बसाकर सैकड़ों परिवारों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले भूमाफियाओं और उनके पूरे नेटवर्क पर अब तक का सबसे बड़ा कानूनी शिकंजा कस दिया है।

पेरई नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी के पूरी तरह जलमग्न होने और सैकड़ों परिवारों के बेघर होने के बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय संयुक्त जांच टीम ने इस महाफर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।
इस पूरे खेल में तत्कालीन सब रजिस्ट्रार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां कीं।

विनिमित क्षेत्र सीतापुर के अवर अभियंता एम.के. मिश्रा की तहरीर पर सूर्या इन्फ्रा डेवलपर्स और खुशबू इन्फ्राटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पार्टनर्स, डायरेक्टर्स और उनके करीबियों के खिलाफ लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया दिया गया है।

बाढ़ के बाद पीड़ितों के विस्थापन और मचे हाहाकार को देखते हुए जिलाधिकारी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), नगर मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी सदर की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी।

सहायक अभियोजन अधिकारी की विधिक आख्या और इस संयुक्त टीम की सघन जांच में यह चौंकाने वाली साजिश सामने आई कि बिल्डर्स और भूमाफियाओं ने मिलकर सरकारी अभिलेखों और जमीनी हकीकत को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।

आरोपियों ने ‘पेरई नदी’ को कागजों पर महज़ एक ‘नाला’ घोषित कर दिया और बिना कोई वैध लेआउट पास कराए, नदी के डूब क्षेत्र में पूरी की पूरी केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी खड़ी कर दी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने मुख्य बिल्डर्स, डायरेक्टर्स और उनके करीबियों को नामजद करते हुए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुकदमों की जद में आने वालो में मुख्य रूप से मुकेश अग्रवाल, श्वेता अग्रवाल (पत्नी मुकेश अग्रवाल), विकास अग्रवाल, रोली श्रीवास्तव, विनीत कुमार, राहुल अग्रवाल (डायरेक्टर – खुशबू इन्फ्राटेक इंडिया प्रा. लि., पुत्र मुकेश अग्रवाल), प्रहलाद राय अग्रवाल इनके अलावा कई अन्य अज्ञात सहयोगी और तत्कालीन सरकारी कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए हैं।

जिलाधिकारी कार्यालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह तो सिर्फ शुरुआत है। फर्जीवाड़े को संरक्षण देने वाले तत्कालीन सब रजिस्ट्रार और अन्य विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी गहराई से स्क्रूटनी की जा रही है, ताकि उन्हें भी जल्द से जल्द सह-आरोपी बनाकर जेल भेजा जा सके।

प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि प्राकृतिक जल स्रोतों से खिलवाड़ करने वाले और जनता की गाढ़ी कमाई को डूब क्षेत्र में फंसाने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।

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