
लखनऊ। श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, आशियाना में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। इस अवसर पर भगवान का अभिषेक, शांति धारा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान विधिविधान से संपन्न हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि त्याग आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण का माध्यम है। मनुष्य को अनावश्यक इच्छाओं, मोह, लोभ और अहंकार का त्याग कर जीवन में संयम, क्षमा और शांति को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्याग ही आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मूलनायक भगवान के अभिषेक एवं शांति धारा में आशियाना के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म से राग-द्वेष एवं अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करने तथा क्षमा और शांति की भावना को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
शाम को मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें महिला मंडल की रिमझिम शाह, सविता जैन, अल्पना जैन, रितु जैन एवं स्वीटी जैन सहित अन्य महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती कर उत्तम त्याग धर्म की आराधना को मंगलमय रूप से संपन्न किया।
इस अवसर पर चंद्रप्रकाश जैन, बृजेश जैन, अजय जैन, संजीव जैन, अखिलेश जैन, शरद जैन, अनुज जैन, पुनीत जैन, तुषार जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





