दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन मनाया गया उत्तम मार्दव धर्म

मान का मर्दन ही उत्तम मार्दव है

लखनऊ। जैन धर्म के दस दिवसीय महापर्व दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया।

इस अवसर पर प्रातःकाल नित्य पूजन के उपरांत भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अहंकार त्यागने और जीवन में विनम्रता अपनाने का संकल्प लिया।
डालीगंज जैन मंदिर में आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज के सान्निध्य में उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचन सुने। आचार्य श्री ने उत्तम मार्दव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मान का मर्दन ही उत्तम मार्दव है। मनुष्य को अपने धन, पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, रूप, रंग अथवा किसी भी उपलब्धि का अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से दूर करता है, जबकि विनम्रता व्यक्ति को महान बनाती है।
उन्होंने कहा कि उत्तम मार्दव हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी सफलता, संपत्ति या सम्मान प्राप्त हो जाए, लेकिन मन में अभिमान नहीं आना चाहिए। सच्ची महानता विनम्रता में है और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना ही उत्तम मार्दव धर्म का मूल संदेश है।
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि आशियाना जैन मंदिर में दिगंबर जैन मुनि उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने किसी भी प्रकार का घमंड न करने तथा जीवन में विनम्रता अपनाने की प्रतिज्ञा लेते हुए पूजा-अर्चना की।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अजय जैन, चंद्रप्रकाश जैन, बंटी जैन, अनुज जैन, तुषार जैन, पुनीत जैन आरजे और अखिलेश जैन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
वहीं डालीगंज क्षेत्र में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में सुबोध जैन, मनोज जैन, पारसव जैन, रितेश जैन, वीर कुमार जैन, शैंकी जैन, पारस जैन और संजीव जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। लखनऊ के अन्य जैन मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की और अहंकार त्यागकर विनम्रता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
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