
रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन
जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभाओं की दुनिया भर में मांग है, जरूरत है कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को विशेष क्षेत्रों में विकसित किया जाए।
एजुकेशन समिट
राज्यपाल मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “एजुकेशन समिट” को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों और ज्ञान परंपरा से जुड़ी हुई है। शिक्षण संस्थाओं को विद्यार्थियों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कारों के विकास के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवाद से ही सुसंवाद की राह बनती है और शिक्षा के माध्यम से समाज एवं देश के विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव, गणित और व्याकरण जैसे महत्वपूर्ण ज्ञान दिए हैं।
प्राचीन भारत में अनेक विश्वविद्यालय ज्ञान के प्रमुख केंद्र
राज्यपाल ने कहा कि जब दुनिया में विश्वविद्यालयों की अवधारणा विकसित नहीं हुई थी, तब भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र मौजूद थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में अनेक विश्वविद्यालय ज्ञान के प्रमुख केंद्र थे, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ परंपरा बताते हुए कहा कि गुरुकुलों में केवल एक विषय का नहीं, बल्कि जीवन के सभी क्षेत्रों का ज्ञान दिया जाता था। भगवान श्रीराम के गुरुकुल शिक्षा ग्रहण करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसी शिक्षा ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के कई प्राचीन आविष्कारों और ज्ञान परंपराओं का उचित श्रेय दुनिया में अन्य लोगों को मिला। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिक और विद्वानों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद शिक्षा व्यवस्था में भारतीय दृष्टिकोण को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए था। उन्होंने नई शिक्षा नीति को भारतीय मूल्यों पर आधारित बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित शैक्षिक उन्नयन और कौशल विकास से जुड़े विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन भी किया।





