प्रधानमंत्री परिसीमन के मुद्दे पर देश को गुमराह कर रहे हैं, कांग्रेस ने साधा तीखा निशाना

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए उन्हें ‘आदतन सत्य से दूर रहने वाला’ बताया।

नयी दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों के पेश होने से ठीक एक दिन पहले सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वे परिसीमन के संवेदनशील मुद्दे पर देश को जानबूझकर अंधेरे में रख रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गुमराह करने की क्षमता बेजोड़ है और उनके द्वारा दिए गए आश्वासन धरातल पर दावों के विपरीत नजर आ रहे हैं।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए उन्हें ‘आदतन सत्य से दूर रहने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि सांसदों को वितरित किए गए विधेयकों की प्रतियां उन वादों से बिल्कुल अलग हैं, जो सरकार पहले करती रही है। रमेश ने विशेष रूप से दक्षिण भारतीय और छोटे राज्यों की चिंता जताते हुए कहा कि नए परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों की लोकसभा में राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के उस वादे का क्या हुआ, जिसमें सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि परिसीमन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर भी वे एक राजनेता के बजाय सत्ता-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आश्वासनों पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि उनके फैसलों से देश के संघीय ढांचे और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। रमेश के मुताबिक, सरकार का यह कदम राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार बृहस्पतिवार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक विधेयक पेश करने जा रही है। इस विधेयक में लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का बड़ा प्रावधान शामिल है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की भी तैयारी कर चुकी है। कांग्रेस की इन आपत्तियों ने संसद के विशेष सत्र से पहले टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, जहां विपक्ष अब परिसीमन के मानकों और राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

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