सीतापुर में साकेत मिश्रा की लोकप्रियता आज भी बरकरार

राजनीति में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी

रामनाथ रावत

सीतापुर। राजनीति में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी पहचान चुनावी नतीजों से नहीं, बल्कि जनता के बीच उनकी मज़बूत पकड़ और कभी न हार मानने वाले जज्बे से होती है।

ऐसे ही एक चर्चित चेहरा हैं साकेत मिश्रा। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से टिकट कटने और पार्टी से निष्कासन जैसी बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करने के बाद भी साकेत मिश्रा ने मैदान नहीं छोड़ा। सीतापुर सदर सीट से तीन बार चुनावी असफलता मिलने के बावजूद आज भी ज़मीन पर उनकी सक्रियता और लोकप्रियता बरकरार है, जिसकी स्थानीय लोग खुलकर तारीफ करते हैं।

साकेत मिश्रा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी की ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ विचारधारा से प्रभावित होकर की थी। हालांकि, बाद में वे भाजपा की ‘अंत्योदय’ नीति की ओर आकर्षित हुए, जिसका मकसद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उदय और वंचितों की सेवा करना है। वैचारिक बदलाव के बाद भी उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा समाज के दबे-कुचले वर्ग की आवाज़ बनना ही रहा। साल 2022 के विधानसभा चुनाव साकेत मिश्रा के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा मोड़ साबित हुए।

इस चुनाव के दौरान जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय निर्दलीय चुनाव लड़ने का साहसिक फैसला किया। पार्टी विरोधी कदम उठाने के कारण भाजपा ने उन्हें निष्कासित भी कर दिया। चुनावी नतीजा भले ही उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि साकेत मिश्रा परिस्थितियों के आगे झुकने वाले नेता नहीं हैं।

साकेत मिश्रा लगातार सरकारी स्कूलों की बदहाली को दूर करने, शिक्षा व्यवस्था को बचाने और विभिन्न सामाजिक सुधारों जैसे जनहित के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज़ उठाते रहे हैं। वे समावेशी राजनीति के प्रबल समर्थक हैं और जातिवाद के खिलाफ बेहद सख्त रुख रखते हैं। अपने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से वे अक्सर समाज को एक कड़ा संदेश देते हुए कहते हैं, “अपनी जाति के व्यक्ति को अच्छा और दूसरी जाति के व्यक्ति को बुरा मानना छोटे मिजाज़ (सोच) की निशानी है।

“यही वजह है कि लगातार तीन हार के बाद भी सीतापुर की जनता के बीच उनकी पकड़ कम नहीं हुई है। सर्वसमाज को एक साथ लेकर चलने की उनकी इसी खूबी के कारण आज भी स्थानीय लोग उनकी राजनीतिक दृढ़ता और अटूट हौसले की सराहना करते हैं।

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