दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन हुई उत्तम तप धर्म की आराधना

शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में चल रहे दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को उत्तम तप धर्म

लखनऊ। शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में चल रहे दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को उत्तम तप धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। इस अवसर पर मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों एवं पूजन की धूम रही।

आशियाना स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने उत्तम तप धर्म की आराधना की। प्रवचन करते हुए उपाध्याय श्री ने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं, विकारों और आसक्तियों पर नियंत्रण पाने की साधना है। तप के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की शक्तियों को पहचानकर आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में संयम, आत्मनियंत्रण और त्याग को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। तप आत्मा को निर्मल बनाने तथा सांसारिक विकारों से दूर करने का माध्यम है।

सातवें दिन मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक विधान एवं अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान ऋषभदेव का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधिवत पूजन कर सुख-शांति और आत्मकल्याण की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और धार्मिक वातावरण बना रहा।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
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