उत्तर प्रदेश में पहली बार ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव का आयोजन

लघु पशुपालन को रोजगार, पोषण और ग्रामीण समृद्धि के सशक्त साधन के रूप में स्थापित

लखनऊ।भेड़, बकरी एवं सूकर पालन को वैज्ञानिक, संगठित एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश में पहली बार आयोजित दो दिवसीय ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026’ का शुभारम्भ आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह एवं राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने किया।
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा गोवंश संरक्षण के साथ-साथ लघु पशुधन क्षेत्र के विकास को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यह कॉन्क्लेव लघु पशुपालन को रोजगार, पोषण और ग्रामीण समृद्धि के सशक्त साधन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

लघु पशुपालन क्षेत्र में निवेश करने की अपील

श्री सिंह ने उद्यमियों से लघु पशुपालन क्षेत्र में निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में और सुदृढ़ कानून व्यवस्था और उत्तम कनेक्टिविटी से पंूजी निवेश का सर्वाधिक अनुकूल अवसर और समय है।श्री सिंह ने कहा कि ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026’ लघु पशुधन क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा, जहां नवीन तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधानों, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, विपणन, निवेश तथा उद्यमिता विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

उन्होंने कहा कि जैव विविधता से समृद्ध उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक पशुधन संपन्न राज्य है। 20वीं पशुगणना के अनुसार प्रदेश में लगभग 144.80 लाख बकरियां, 9.85 लाख भेड़ें तथा 4.09 लाख सूकर हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पोषण सुरक्षा तथा किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करने में लघु पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

बकरी पालन

विभाग द्वारा लघु पशुधन पशुपालकों के विकास हेतु बकरी पालन की योजना संचालित है, जिसकी इकाई लागत रू0 60000 है, जो कि 90 प्रतिशत अनुदानित है। वर्ष 2025-26 कुल 1786 इकाईयां स्थापित की गयी तथा वर्ष 2026-27 में बकरी पालन की योजनान्तर्गत 1896 इकाईयों का लक्ष्य प्रस्तावित है।

भेड़ पालन

इसी प्रकार भेड़ पालन की योजना वर्ष 2025-26 में 224 इकाईयों, जिसकी इकाई लागत 170000 रूपये है जो कि 90 प्रतिशत अनुदानित है, स्थापित की गयी तथा वर्ष 2026-27 हेतु 225 भेड़ पालन इकाईयांे का लक्ष्य प्रस्तावित है।

सूकर पालन

सूकर विकास हेतु सूकर पालन की योजना भी संचालित है, जिसमें वर्ष 2025-26 मंे 218 इकाईयांे, जिसकी इकाई लागत 147400 रूपये है, यह भी 90 प्रतिशत अनुदानित है। वर्ष 2026-27 हेतु 218 सूकर पालन इकाईयों का लक्ष्य प्रस्तावित है।

आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम

इस अवसर पर पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री  कृष्णा पासवान ने कहा कि लघु पशुपालन ग्रामीण महिलाओं, छोटे एवं सीमांत किसानों तथा युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भेड़, बकरी एवं सूकर पालन अपेक्षाकृत कम लागत में बेहतर आय प्रदान करने वाले व्यवसाय हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूती मिल रही है।
कान्क्लेव में प्रदेश में पशुपालन एवं लघु पशुधन क्षेत्र के सतत विकास, किसानों की आय वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग एवं ग्लोबल फोरम फॉर सस्टेनेबल ट्रांसफॉर्मेशन (GFST) और पशुपालन विभाग एवं द गोट ट्रस्ट (The Goat Trust) के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इन समझौतों के तहत विभाग को नीतिगत एवं तकनीकी सहयोग, क्षमता संवर्धन, प्रशिक्षण, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, नवाचार आधारित समाधान तथा बकरी पालन एवं पशुधन विकास से संबंधित कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्राप्त होगा।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि ‘यू.पी. स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव-2026’ वैज्ञानिकों, उद्यमियों और पशुपालकों के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच सिद्ध होगा तथा प्रदेश में लघु पशुधन आधारित उद्यमिता को नई गति प्रदान करेगा।

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