
रामनाथ रावत
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में मंगलवार को उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास पर समाजवादी पार्टी (सपा) के खिलाफ लगाई गई एक बेहद विवादित होर्डिंग को लेकर भारी हंगामा हुआ।
आग लगाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया
मामले की जानकारी मिलते ही धौरहरा से समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ होर्डिंग को पोल से नीचे उतरवाया, बल्कि बीच सड़क पर ही उसमें आग लगाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर अज्ञात लोगों द्वारा लगाई गई इस होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव की तस्वीरें छपी थीं।
होर्डिंग पर बड़े-बड़े अक्षरों में “बगल में बाबर, मुंह में राम” जैसे आपत्तिजनक शब्द लिखे गए थे। इस होर्डिंग की सबसे खास और संदिग्ध बात यह थी कि इस पर किसी भी प्रकाशक, प्रिंटिंग प्रेस, व्यक्ति, संस्था या किसी राजनीतिक संगठन का नाम दर्ज नहीं था। राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक लगी इस विवादित होर्डिंग को देखकर वहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
सरकारी तंत्र और सूचना विभाग की बड़ी भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही सपा सांसद आनंद भदौरिया तुरंत मौके पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं के आक्रोश के बीच सांसद ने होर्डिंग को हटवाया और उसे आग के हवाले कर दिया। बता दें कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी सीतापुर में सपा विरोधी एक विवादित होर्डिंग लगाई गई थी, जिसे सांसद आनंद भदौरिया ने खुद खंभे पर चढ़कर उतारा था।मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद आनंद भदौरिया ने सीधे तौर प्रशासन को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह किसी स्थानीय आम नागरिक या आम व्यक्ति का काम नहीं है। इसके पीछे सीधे तौर पर सरकारी तंत्र और सूचना विभाग की बड़ी भूमिका नजर आ रही है।
जानबूझकर इस तरह की घटिया होर्डिंग लगाकर उत्तर प्रदेश के शांत माहौल को खराब करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। सांसद भदौरिया ने आगे कहा कि इस गंभीर मामले को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके पीछे जो भी ताकतें काम कर रही हैं, उनके खिलाफ पार्टी स्तर पर एक मजबूत कानूनी और राजनीतिक रणनीति तैयार की जाएगी।
फिलहाल, इस घटना के बाद से जिले में राजनीतिक बयानबाजी और तल्खी बेहद तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे संवेदनशील मामले और सुरक्षा चूक को लेकर स्थानीय प्रशासन या पुलिस की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।





