
लखनऊ। समय की कीमत करना सीखो। जिसने समय की कीमत समझी और उसका सदुपयोग किया, वही जीवन में सफलता और तरक्की के शिखर तक पहुँचता है।
यह बात पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पावन वर्षायोग (चातुर्मास) के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा।
उपाध्याय श्री ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसका समय है। धन, पद और वैभव दोबारा प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। इसलिए प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।
उन्होंने कहा, “समय पर किया गया कार्य ही सम्मान, सफलता और सही पहचान दिलाता है।” जो व्यक्ति आलस्य, टालमटोल और प्रमाद से दूर रहकर समय का सदुपयोग करता है, उसके जीवन में उन्नति के सभी द्वार स्वतः खुल जाते हैं।
पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें, अनुशासित दिनचर्या अपनाएँ तथा धर्म, शिक्षा और संस्कारों के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि समय का सदुपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता का ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का भी आधार है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूज्य उपाध्याय श्री के मंगल प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया तथा उनके प्रेरणादायी संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सभा में मुख्य रूप से चंद्रप्रकाश जैन, ब्रिजेश जैन, अजय जैन, नलिन राज कासलीवाल, संजीव जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।





