भगवान की भक्ति से ही आत्मिक सुख की प्राप्ति हो सकती है-आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज

इंदिरा नगर जैन मंदिर में आचार्य सुबल सागर जी महाराज

लखनऊ। भगवान की भक्ति से ही आत्मिक सुख की प्राप्ति हो सकती है। भौतिक सुख की चाह में व्यक्ति भटक रहा है लेकिन सच्चा सुख आत्मा में ही निहित है। इंदिरा नगर जैन मंदिर में आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने शनिवार को प्रवचन के माध्यम से जन मानस को यह संदेश दिया। 

गुरुदेव ने कहा कि दुख में सुमिरन सब करें सुख में करें न कोय अर्थात जब व्यक्ति परेशान होता है तो भगवान की शरण में पहुंचा जाता है परंतु सुख के समय वो पूर्ण रूप से भगवान को भूल जाता है । जो व्यक्ति नित प्रतिदिन भगवान की भक्ति करता है,भावों को विशुद्ध रखता है वह कभी दुखी हो ही नहीं सकता है ।
इससे पूर्व आज प्रातः सहस्त्र नाम का वाचन गुरुदेव के मुखारबिंद से किया गया एवं सायं काल में भक्तामर स्त्रोत एवं दीपर्चन का कार्यक्रम हुआ ।
महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि आचार्य श्री का आज उपवास रहा एवं गुरुदेव अपनी साधना को नित प्रतिदिन कठोर कर रहे हैं। तप एवं त्याग उत्कृष्ट अवस्था पर पहुंच रहा है। कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष पी के जैन एवं सांस्कृतिक मंत्री ऋषभ जैन ने बाहर से पधारे हुए अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
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