
रामनाथ रावत
सीतापुर। देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की प्रतिमा करीब 15 साल बाद बुधवार शाम 5 बजे मिश्रिख कोतवाली के मालखाने से बाहर निकाली गई।
न्यायालय के आदेश के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर भारतीय सिख संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रतिमा को ससम्मान रिलीज कराया।मालखाने से बाहर आते ही गगनभेदी देशभक्ति के नारों और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ प्रतिमा को नैमिषारण्य स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया। इस दौरान पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2010 का है, जब नैमिष के ठाकुर नगर स्थित एक सार्वजनिक पार्क में बिना पूर्व अनुमति के शहीद उधम सिंह की प्रतिमा स्थापित की जा रही थी। उस समय कुछ ग्रामीणों के विरोध के बाद यह मामला कोतवाली पहुंच गया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रतिमा को अपने कब्जे में लेकर मालखाने में रखवा दिया था।
हालांकि, मुकदमा दर्ज होने के बाद संबंधित लोगों को जमानत मिल गई थी, लेकिन प्रशासनिक उलझनों के कारण यह प्रतिमा पिछले डेढ़ दशक से मालखाने में ही कैद रही। शहीद की प्रतिमा को एक सम्मानजनक स्थान पर स्थापित कराने के लिए भारतीय सिख संगठन लंबे समय से कानूनी पैरवी कर रहा था। आखिरकार कोर्ट के आदेश के बाद इसे रिलीज करने का रास्ता साफ हुआ।
बुधवार को संगठन के जिलाध्यक्ष गुरपाल सिंह की अगुवाई में 100 से अधिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मिश्रिख कोतवाली पहुंचे और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर प्रतिमा को ससम्मान बाहर निकाला। भारतीय सिख संगठन के जिलाध्यक्ष गुरपाल सिंह ने भावुक होते हुए कहा, शहीद उधम सिंह ने देश के स्वाभिमान के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था।
उनकी प्रतिमा का इतने वर्षों तक मालखाने में बंद रहना पूरे समाज के लिए पीड़ादायक था। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रतिमा को नैमिषारण्य के गुरुद्वारा साहिब में पूरी मर्यादा के साथ सुरक्षित रखा गया है। जल्द ही सभी पक्षों की सर्वसम्मति से निर्णय लेकर इसे किसी उपयुक्त और सम्मानजनक स्थान पर स्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा।





