एसएमएस अस्पताल में जल्द शुरू होगी अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब

जहर की होगी सटीक पहचान

रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन

जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल में करीब नौ महीने से तैयार अत्याधुनिक टॉक्सिकोलॉजी लैब अब जल्द शुरू होगी। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने लैब के संचालन के आदेश जारी होने की जानकारी दी है।

तकनीकी समस्या और जांच के लिए आवश्यक सरकारी कोड जनरेट नहीं होने के कारण अब तक लैब का संचालन अटका हुआ था।

जहर खाने और ड्रग ओवरडोज के मामलों में मरीज के शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ की सटीक पहचान के लिए यह लैब तैयार की गई है। लैब में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं, विशेषज्ञ एवं तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति भी हो चुकी है और ट्रायल रन पूरा किया जा चुका है। हालांकि, जांच की दर और सरकारी उपचार व्यवस्था के लिए आवश्यक कोड निर्धारित नहीं होने से नियमित जांच शुरू नहीं हो सकी थी।

ब्लड, यूरिन, लार और बाल के नमूनों की होगी जांच

डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार, एसएमएस अस्पताल की यह नॉर्थ इंडिया की पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब है। यहां मरीज के ब्लड, यूरिन, लार और बाल के नमूनों की जांच के जरिए शरीर में मौजूद विषैले तत्वों की पहचान की जा सकेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मरीज ने किस प्रकार का जहरीला पदार्थ लिया है और शरीर में उसका कितना प्रभाव है।

इसके अलावा जहरीले जीव-जंतु के काटने से संबंधित मामलों में भी जांच के जरिए विष की प्रकृति का पता लगाने में मदद मिलेगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद चिकित्सकों के लिए मरीज के उपचार की दिशा तय करना आसान होगा। इसके आधार पर आवश्यक दवा और उसकी मात्रा निर्धारित करने में भी सहायता मिलेगी।

हर माह 100 से 150 मामले पहुंचते हैं

डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि एसएमएस अस्पताल में हर महीने करीब 100 से 150 मरीज पॉइजनिंग और ड्रग ओवरडोज के मामले लेकर पहुंचते हैं। वर्तमान में ऐसे मामलों में कई बार मरीज के लक्षणों के आधार पर उपचार शुरू करना पड़ता है। नई लैब शुरू होने के बाद विषैले पदार्थ की पहचान के लिए अस्पताल में ही जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

निजी जांच केंद्रों में इस तरह की टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए करीब 3 हजार से 10 हजार रुपए तक शुल्क लिया जाता है। सरकारी अस्पताल में लैब शुरू होने से मरीजों को कम खर्च में सटीक जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

कोड नहीं बनने से अटका था संचालन

एसएमएस अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. प्रदीप शर्मा ने बताया कि टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए आवश्यक मशीनें पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। लैब के लिए तकनीकी स्टाफ भी उपलब्ध है, लेकिन सरकारी व्यवस्था में जांच, उपचार और दवाओं को शामिल करने के लिए आवश्यक कोड निर्धारित नहीं हो पाया था।

सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार और दवाओं की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित प्रक्रियाओं के तहत कोड निर्धारित किए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के लंबित रहने के कारण लैब का संचालन शुरू नहीं हो सका था। अब संचालन के आदेश जारी होने के बाद लैब को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।

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