सीतापुर सपा में ‘तख्तापलट’, अचानक बदले गए जिलाध्यक्ष

सियासी गलियारों में मची हलचल

रामनाथ रावत

सीतापुर। समाजवादी पार्टी में इन दिनों मौसम की तरह सियासत का पारा भी अचानक बदल गया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक ऐसा ‘गुगली’ फेंका है जिससे जिले के कई नेताओं के स्टंप उड़ गए हैं।

वर्तमान जिला अध्यक्ष छत्रपाल यादव को तत्काल प्रभाव से ‘नॉन-स्ट्राइकर एंड’ पर भेज दिया गया है, यानी उनकी छुट्टी कर दी गई है। उनके स्थान पर पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद और ‘रिटायर्ड हर्ट’ चल रहे पुराने खिलाड़ी शमीम कौसर सिद्दीकी को फिर से कप्तानी सौंप दी है।

इस अचानक हुए फेरबदल से जिले के सपाई खेमे में वैसी ही हलचल है, जैसी बिना बताए घर में मेहमान आने पर होती है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सीतापुर में समाजवादी पार्टी के भीतर और बाहर भारी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही थी। बीते दिनों जिले में स्थित सपा कार्यालय पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर से कार्रवाई की गई थी।

विवादित होर्डिंग लगाने का मामला

इसके तुरंत बाद, शहर में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की एक विवादित होर्डिंग लगाने का मामला भी सामने आया, जिसने पार्टी की गुटबाजी और प्रशासनिक तालमेल की कमी को उजागर कर दिया। इन लगातार घटते राजनीतिक घटनाक्रमों, स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों और सांगठनिक असंतोष को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व को यह बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। शमीम कौसर सिद्दीकी समाजवादी पार्टी के बेहद पुराने और अनुभवी नेता माने जाते हैं।

10 वर्षों तक सीतापुर में सपा के जिला अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी

वह इससे पहले साल 2005 से लेकर 2015 तक लगातार 10 वर्षों तक सीतापुर में सपा के जिला अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके लंबे कार्यकाल के दौरान जिले में पार्टी का संगठन काफी मजबूत स्थिति में था। अब एक बार फिर मुश्किल दौर और आंतरिक कलह के बीच, पार्टी ने उनके इसी पुराने संगठनात्मक अनुभव और सबको साथ लेकर चलने की क्षमता पर दांव खेला है। शमीम कौसर सिद्दीकी के 2015 में हटने के बाद इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी छत्रपाल सिंह यादव को सौंपी गई थी।

हालांकि, बदलते राजनीतिक समीकरणों, हालिया विवादों और संगठन को नई धार देने के उद्देश्य से नेतृत्व ने अब छत्रपाल यादव को हटाकर नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया है। अचानक हुए इस बदलाव के बाद से जिले के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

जहां शमीम कौसर के समर्थकों और पुराने कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, वहीं छत्रपाल गुट के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।आने वाले चुनावों और जिले में बिगड़े पार्टी के माहौल को सुधारने के लिहाज से सपा का यह फैसला सीतापुर की राजनीति में बेहद अहम मोड़ ला सकता है।

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