
लखनऊ। बहुत जल्दी लखनऊ की धरा एक ऐसे मेडिटेशन गुरु का चातुर्मास होने वाला है जिनके ज्ञान, भक्ति और शक्ति से लोग एक अलग तरह की ऊर्जा प्राप्त करेंगे। चार महीने चलने वाले चातुर्मास कई तरीके के अनुष्ठान किए जाएंगे।
बताते चलें कि आगामी 19 जुलाई को आशियाना जैन मंदिर में मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज(ससंघ) अपने चातुर्मास का कलश स्थापना करेंगे।

मेडिटेशन गुरु ने अपने संत जीवन में दस वर्षा योग उत्तर प्रदेश,पांच वर्षा योग दिल्ली, सात वर्षा योग मध्य प्रदेश,दो वर्षा योग छत्तीसगढ़ व एक वर्षा योग हरियाणा मैं किया है। जिन्होंने अब तक 80 मंदिरो का जीर्णोद्धार,55 पंचकल्याणक,380 वेदी प्रतिष्ठा,95 शिखर,780 शिखर कलशा रोहण,47 नवीन जिन मंदिर,13 चौबीसी मान स्तंभ,कीर्ति स्तंभ,187 संत भवन,59 श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान,6 हॉस्पिटल,7 जैन स्कूल व 3 भोजन शाला संचालित करवाई है।
गुरु श्री श्री अब तक 26 वर्षो में 90 हजार किलोमीटर की पद यात्रा कर चुके है। महाराज श्री ने आजीवन 80 चीजों अपने खान-पान से त्याग कर रखा है। जिसमें मुख्य रूप से दही,तेल और मीठी वस्तुएं शामिल है। वह मंदिर का जीर्णोद्धार के समय एक चीज का त्याग करते है।
फिर संकल्प के साथ जीर्णोधार पूर्ण होने पर उसका आजीवन उसका त्याग करते है। महाराज श्री के वचन में हमेशा सरस्वती विराजमान रहती है जिनका कहा हर कार्य लगभग पूरा होता है।
महाराज श्री दिन भर में चार बार लोगों को धर्म और भक्ति का ज्ञान भी देते हैं। महाराज श्रीआजीवन हर प्रकार की दवाइयों का त्याग कर रखा है। महाराज श्री से पूरे भारत वर्ष में हजारों श्रद्धालु जुड़े हुए हैं। महाराज श्री की भक्ति से हमेशा लोगों का कल्याण हुआ है।




