
रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन
जयपुर। राजस्थान रिफाइनरी परियोजना से राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसरों का विस्तार होगा। इसके तहत एचपीसीएल (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड) प्रदेशभर में पहले चरण में 300 से अधिक नए पेट्रोल पंप स्थापित करेगा। इन रिटेल आउटलेट्स के लिए राज्य सरकार सरकारी भूमि को लीज पर उपलब्ध कराएगी।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में एचपीसीएल और एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) के अधिकारियों के साथ इस योजना की प्रगति की बीती शनिवार को समीक्षा की। बैठक में सरकारी भूमि को लीज पर देकर पेट्रोल पंप स्थापना की प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा हुई।
राजस्थान रिफाइनरी प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। करीब 80 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से राज्य में उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत 304 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। इन नए पेट्रोल पंपों की स्थापना के लिए एचपीसीएल करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई तक नई नीति तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से सरकारी भूमि एचपीसीएल को लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पेट्रोल पंप स्थापना की प्रक्रिया को सरल और तेज किया जा सकेगा।
एचपीसीएल और एचआरआरएल ने राज्य सरकार से आरटीपीपी अधिनियम के तहत सरकारी विभागों द्वारा ईंधन खरीद में उन्हें प्रेफरेंशियल सप्लायर का दर्जा देने का आग्रह भी किया। इसका उद्देश्य राजस्थान स्थित एचआरआरएल रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार ने एचपीसीएल और एचआरआरएल के साथ मिलकर सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान) अपर्णा अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा) कुलदीप रांका, अतिरिक्त मुख्य सचिव (यूडीएच) आलोक गुप्ता, प्रमुख सचिव (वित्त) वैभव गलारिया, प्रमुख सचिव (राजस्व) टी. रविकांत और एचपीसीएल के विपणन निदेशक अमित गर्ग सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।





