
लखनऊ। दशलक्षण महापर्व के छठे दिन सोमवार को जैन समाज द्वारा उत्तम संयम धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई।
आशियाना स्थित दिगंबर जैन महावीर मंदिर में विराजमान पूज्य उपाध्याय श्री 108 विसंत सागर जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि संयम अर्थात नियंत्रण। अपनी इंद्रियों, मन, वाणी और व्यवहार में संयम रखना ही उत्तम संयम है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में संयम को अपनाता है तो इसका प्रभाव केवल आत्मिक कल्याण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके व्यवहारिक जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। संयम जीवन में शांति लाता है और व्यक्ति की क्षमताओं को बढ़ाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को उत्तम संयम धर्म को अपने जीवन में अंगीकार करना चाहिए।
आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः से ही उत्तम संयम धर्म की विधिवत पूजा-अर्चना हुई। जैन श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की और उत्तम संयम धर्म की पूजा करते हुए उपाध्याय श्री के प्रवचन सुने।
धूप दशमी का हुआ आयोजन
दशलक्षण महापर्व के छठे दिन दोपहर करीब डेढ़ बजे सभी जैन मंदिरों में भगवान शीतलनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। धूप दशमी के पावन अवसर पर जैन श्रद्धालुओं ने अग्नि में धूप अर्पित कर कर्मों के नाश, विश्व में शांति तथा बुराइयों के समाप्त होने की मंगलकामना की।
लखनऊ के डालीगंज, इंदिरानगर, गोमतीनगर, गुडंबा, चारबाग, आशियाना, सआदतगंज, यहियागंज और चौक सहित विभिन्न जैन मंदिरों में उत्तम संयम धर्म की पूजा एवं धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा के साथ संपन्न हुए।
चारबाग में धर्मशाला के 100 वर्ष पूरे होने पर भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि चारबाग स्थित दिगंबर जैन मंदिर में श्री मुन्नेलाल कागजी जैन धर्मशाला के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। अजय जैन कागजी के निर्देशन में महिलाओं ने भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर मंदिर एवं धर्मशाला को आकर्षक रोशनी, लाइटों एवं झालरों से सजाया गया है।





