सेप्सिस के मामले में मायने रखता है हर मिनट-प्रोफेसर (डॉ.) वेद प्रकाश

सेप्सिस में निवेश करें–जानें बचाएं

लखनऊ। सेप्सिस एक जटिल और जीवन-घातक स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से व्यापक सूजन और ऊतक क्षति होती है। विभिन्न कारकों और प्रकार के संक्रमणों से सेप्सिस हो सकता है।

प्रोफेसर (डॉ.) वेद प्रकाश ने बताया की वर्ल्ड सेप्सिस डे के मौके पर पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, ‘पल्मोक्रिट फाउंडेशन’ की देखरेख में ‘सोसाइटी ऑफ़ प्रिसिजन मेडिसिन एंड इंटेंसिव केयर’ और ‘नेशनल एकेडमी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (उत्तर प्रदेश चैप्टर)’ के साथ मिलकर 12 और 13 सितंबर को दो दिन की कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम का मकसद हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के बीच सेप्सिस मैनेजमेंट को लेकर जागरूकता बढ़ाना और बेहतर तरीकों को बढ़ावा देना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

 “सेप्सिस के मामले में मायने रखता है हर मिनट ”
 “सेप्सिस के संकेतों को जल्दी पहचाने और उठाएं सही कदम ”
 “सेप्सिस के लिए सही एंटीबायोटिक, सही डोज़ और सही समय तक देने से बच सकती है जान”
 “एंटीबायोटिक्स, के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचे।
 माइक्रोबियल दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बदल रही है।”
 दवा-प्रतिरोधी (ड्रग-रेसिस्टेंट) इन्फेक्शन है विश्वस्तरीय समस्या। ध्यान न देने पर पहुंचा सकता है प्री एंटीबायोटिक समय पर ।
 “नए और दवा-प्रतिरोधी (ड्रग-रेसिस्टेंट) इन्फेक्शन में हो रही बढ़ोत्तरी जीवन के लिए घातक है
 हेल्थकेयर सिस्टम में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्य-स्तर पर कदम उठाना है ज़रूरी
 सेप्सिस जैसी गम्भीर बीमारी से प्रत्येक 3 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु होती है।

सेप्सिस में निवेश करने का क्या मतलब है?

1) रोकथाम में निवेश करना
2) जल्दी पहचान और अच्छी देखभाल में निवेश करना
3) हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स में निवेश करना
4) रिसर्च और इनोवेशन में निवेश करना
5) हेल्थ सिस्टम और ग्लोबल एक्शन में निवेश करना

सेप्सिस के कारण

जीवाणु संक्रमणः सेप्सिस का सबसे आम कारण, जीवाणु संक्रमण, है जो विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न हो सकता है जैसे मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई), निमोनिया, त्वचा और साॅफ्ट टिष्यू में संक्रमण, पेट संक्रमण और रक्तप्रवाह संक्रमण (बैक्टीरिमिया) इत्यादि।
वायरल संक्रमणः गंभीर इन्फ्लूएंजा, एचआईवी से संबंधित संक्रमण और वायरल निमोनिया जैसे वायरल संक्रमण भी सेप्सिस का कारण बन सकते हैं।
फंगल संक्रमणः कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों में फंगल संक्रमण के कारण सेप्सिस का खतरा अधिक होता है। सामान्य कवक प्रजातियों में कैंडिडा और एस्परगिलस प्रजातियां शामिल हैं।
 परजीवी संक्रमणः मलेरिया जैसे परजीवी संक्रमण सेप्सिस का कारण बन सकते हैं।
अस्पताल से प्राप्त संक्रमणः स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में मरीजों को सर्जिकल साइट संक्रमण, कैथेटर से जुड़े संक्रमण (जैसे, सेंट्रल लाइन से जुड़े रक्तप्रवाह संक्रमण), और वेंटिलेटर से जुड़े निमोनिया इत्यादि हो सकता है।
समुदाय-प्राप्त संक्रमणः स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के बाहर होने वाले संक्रमण, जैसे त्वचा के फोड़े, यूटीआई और स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण भी सेप्सिस में बदल सकते हैं।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, जैसे कि कीमोथेरेपी से गुजरने वाले, प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता, और एचआईवी एड्स वाले व्यक्तियों में संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आते हैं।
दीर्घकालिक चिकित्सा स्थितियाँः मधुमेह, क्रोनिक किडनी रोग और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी पुरानी बीमारियाँ संक्रमण की संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं, जो सेप्सिस तक बढ़ सकती हैं।

सेप्सिस के लक्षण

सेप्सिस एक चिकित्सीय आपातकाल है जो तेजी से फैल सकता है। शीघ्र उपचार के लिए इसके संकेतों और लक्षणों की शीघ्र पहचान महत्वपूर्ण हैः
1. बुखार या हाइपोथर्मिया
2. हृदय गति का बढ़ना
3. तेजी से सांस लेना एवं सांस फूलना
4. भ्रम या परिवर्तित मानसिक स्थिति
5. निम्न रक्तचाप
6. सांस लेने में कठिनाई
7. अंग की खराबी के लक्षणः जैसे-जैसे सेप्सिस बढ़ता है, यह अंग के कार्य को खराब कर सकता है, जिससे मूत्र उत्पादन में कमी, पेट में दर्द, पीलिया और थक्के जमने की समस्या जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं।
8. त्वचा में परिवर्तनः सेप्सिस के कारण त्वचा धब्बेदार या बदरंग हो सकती है, जो पीली, नीली या धब्बेदार दिखाई दे सकती है और छूने पर त्वचा असामान्य रूप से गर्म या ठंडी महसूस हो सकती है।
9. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षणः सेप्सिस से पीड़ित कुछ व्यक्तियों को मतली, उल्टी, दस्त या पेट में परेशानी का अनुभव होता है।
10. सेप्टिक शॉकः सबसे गंभीर मामलों में, सेप्सिस सेप्टिक शॉक में बदल सकता है, जिसमें बेहद कम रक्तचाप, परिवर्तित चेतना और कई अंग विफलता के लक्षण होते हैं। सेप्टिक शॉक एक जीवन-घातक आपातकाल है।
11. संक्रमणः मूल संक्रमण में फेफड़ों के संक्रमण या यूटीआई के साथ मूत्र संबंधी लक्षणों के मामले में खांसी जैसे लक्षण हो सकते हैं, जो सेप्सिस में बदल सकते हैं।

सेप्सिस की पहचान

नैदानिक मूल्यांकनः निदान एक संपूर्ण नैदानिक मूल्यांकन से शुरू होता है, जहां स्वास्थ्य सेवा प्रदाता रोगी के चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षण के निष्कर्षों और बुखार, हृदय गति में वृद्धि, तेजी से सांस लेने और बदली हुई मानसिक स्थिति जैसे लक्षणों का मूल्यांकन करते हैं।
संदिग्ध संक्रमणः सेप्सिस के निदान का एक महत्वपूर्ण घटक एक संदिग्ध या पुष्टि किए गए संक्रमण की पहचान करना है
प्रयोगशाला परीक्षणः सेप्सिस का निदान करने के लिए रक्त परीक्षण आवश्यक हैं। इसमें बायोकेमिस्टी,(सीबीसी), और सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) और प्रोकैल्सीटोनिन जैसे सूजन मार्करों का माप आमतौर पर किया जाता है। असामान्य परिणाम, जैसे कि बढ़ी हुई श्वेत रक्त कोशिका ,चल रहे संक्रमण का संकेत देते हैं।
 इमेजिंगः छाती के एक्स-रे या सीटी स्कैन जैसे इमेजिंग अध्ययन का उपयोग संक्रमण के स्रोत या निमोनिया या संक्रमण जैसी जटिलताओं की पहचान करने के लिए किया जा सकता है, जो सेप्सिस के निदान में सहायता करता है।
सूक्ष्मजैविक परीक्षणः रक्त, मूत्र, थूक या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संवर्धन के माध्यम से रोगजनक की पहचान करने से लक्षित एंटीबायोटिक परीक्षण से चिकित्सा का मार्गदर्शन करने में मदद मिलती है।
सिंड्रोमिक परीक्षणः सिंड्रोमिक परीक्षण के लिए आणविक निदान उपकरण एक ही रोगी के नमूने से कई रोगजनकों और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन का तेजी से पता लगा सकते हैं, जिससे संक्रमण की सटीक पहचान करने और एंटीबायोटिक चिकित्सा को परिवर्तित करने में सहायता मिलती है।

विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ एकत्रित हुए। प्रतिष्ठित विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश (हेड, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन), प्रो.(डा.) सूर्यकान्त (हेड, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, KGMU), प्रो. (डा.) अपुल गोयल (यूरोलॉजी विभाग, KGMU) और डा सौमित्र मिश्रा (सी.सी.एम. विभाग, KGMU) ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस कार्यक्रम में डा सचिन कुमार, डा मों0 आरिफ, डा अनुराग ,डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. यश जगधारी, डा दीपक, डा. नन्दनी दिक्षित डा सुभ्रा, डा संदीप, डा अपर्णा, डा दीपक, डा हर्षिता एवं अन्य डाक्टर स्टाफ उपस्थित रहे।

Rajeev Jain

rajeevcrime@gmail.com
Back to top button