
लखनऊ। इंदिरा नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आज पहली बार चातुर्मास के दौरान आचार्य सुबल सागर जी महाराज एवं उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज का मंगल प्रवचन कार्यक्रम एक ही मंच पर हुआ। दोनों संतों का एक साथ मंगल प्रवचन होना लखनऊ में प्रथम अवसर रहा।

आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा के महत्व को समझाते हुए कहा कि “पत्थर से भगवान बनाने की प्रक्रिया ही प्राण प्रतिष्ठा है।” उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण अवसर है।
उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ने कहा कि “इंसान अपने कषायों को भी त्यागकर भगवान बन सकता है।” उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों का त्याग करके मनुष्य आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है और अपने जीवन को भगवान बनने की दिशा में ले जा सकता है।

आगामी प्राण प्रतिष्ठा में बनने वाले भगवान के माता-पिता धनकुमार जैन एवं उषा जैन, सौधर्म इंद्र अखिलेश जैन एवं शुक्ति जैन तथा दूसरी पंचकल्याणक रथ के माता-पिता पी.के. जैन एवं विमला जैन का समाज की ओर से स्वागत किया गया। गोद भराई की रस्म के मद्देनजर सभी का फल एवं मिष्ठान्न भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अभिषेक जैन, ऋषभ जैन, पी.के. जैन, आदिश कुमार जैन, चंद्र प्रकाश जैन, अखिलेश जैन, अजय जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के रूप में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्राण प्रतिष्ठा में बनने वाले सभी पात्रों का एक साथ सम्मान समारोह अहिंसा वाटिका में रखा गया है। इससे पूर्व दिगंबर जैन मंदिर से एक बड़ी भव्य शोभायात्रा प्रारंभ होकर अहिंसा वाटिका पहुंचेगी। कार्यक्रम में आचार्य सुबल सागर जी महाराज एवं उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त होगा।





