राजस्थान पुलिस करेगीअब बड़े ड्रग माफिया और गैंगस्टर्स की संपत्तियां जब्त

राजस्थान पुलिस ने पिछले छह महीनों में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और तकनीक आधारित पुलिसिंग

रिपोर्ट – सिद्धार्थ जैन

जयपुर। राजस्थान पुलिस ने पिछले छह महीनों में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने का दावा किया है।

गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने सोमवार को राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनवरी से जून 2026 तक का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए बताया कि गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि अब पुलिस की प्राथमिकता केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की रोकथाम, अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर प्रहार और तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को मजबूत करना है।

डीजीपी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज कुल मामलों की संख्या 2025 की समान अवधि के 99,272 से घटकर इस वर्ष 94,652 रह गई है। वहीं स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पुलिस की सक्रिय कार्रवाई का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो तथा एससी-एसटी एक्ट के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। संपत्ति संबंधी अपराधों में भी बरामदगी का प्रतिशत बढ़ा है। नकबजनी के मामलों में बरामदगी 9.58 प्रतिशत से बढ़कर 58.24 प्रतिशत और लूट के मामलों में 71 प्रतिशत से बढ़कर 79.09 प्रतिशत हो गई है।

नशा तस्करों और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान तेज करते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पुलिस ने बड़े ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई तस्करों की करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया है।

कालिका पेट्रोल यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड, सुरक्षा सखी और वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर

महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। छेड़छाड़, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में कमी आने के साथ ही अनुसंधान की अवधि भी घटाई गई है। पुलिस ने कालिका पेट्रोल यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड, सुरक्षा सखी और वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाया है।

साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए सभी 41 पुलिस जिलों में साइबर पुलिस थाने स्थापित किए जा चुके हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 को 53 लाइनों तक विस्तारित किया गया है तथा दो व्हाट्सएप नंबर भी शुरू किए गए हैं। पांच लाख रुपये तक के साइबर अपराधों में जीरो एफआईआर की सुविधा लागू होने के बाद अब तक 405 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में 174 आरोपियों की गिरफ्तारी और 52 करोड़ रुपये से अधिक की राशि होल्ड की गई है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद पुलिस के तकनीकी संवर्ग में 403 पदों का पुनर्गठन किया गया है, जिससे चालक, घुड़सवार और बैंड शाखा के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के नए अवसर खुलेंगे।

भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए डीजीपी ने कहा कि अब सीआईडी (सीबी), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एजीटीएफ के माध्यम से बड़े ड्रग माफिया, रंगदारी वसूली करने वाले गैंगस्टर्स और संगठित अपराधियों के खिलाफ उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने की व्यापक कार्रवाई की जाएगी।

आवश्यकता पड़ने पर विदेशों में छिपे अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। साथ ही प्रस्तावित राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) के माध्यम से साइबर अपराधों पर और प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा।

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