
रामनाथ रावत
सीतापुर। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिधौली के अधीक्षक डॉ. आनंद कुमार सिंह ने मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए एक अपील जारी की थी।
इस अपील पर त्वरित कदम उठाते हुए क्षेत्र के पंजीकृत निजी अस्पताल संचालकों ने संवेदनशीलता दिखाई और अस्पताल को पांच नए कूलर भेंट किए। शुरुआत में इसे एक सराहनीय सामाजिक कार्य के रूप में देखा गया। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। आम जनता और सोशल मीडिया पर लोग इस ‘दान’ के पीछे छिपे उद्देश्यों को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।
तीखे सवाल उठाए
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अक्सर अवैध या नियमों की अनदेखी करने वाले निजी अस्पतालों पर जांच और कार्रवाई करता रहता है। ऐसे में यह दान कहीं भविष्य की विभागीय कार्रवाई से बचने का ‘सुरक्षा कवच’ तो नहीं है? उक्त
हाथ फैलाने की नौबत क्यों आई
मामले को लेकर क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने भी तीखे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों को बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव के लिए शासन से अलग से भारी-भरकम बजट मिलता है। ऐसे में सीएचसी प्रशासन को निजी संस्थाओं के सामने हाथ फैलाने की नौबत क्यों आई? इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से गरमा रहा है।
कुछ यूजर्स इसे सरकारी तंत्र और निजी डॉक्टरों के बीच की अंदरूनी ‘सैटिंग’ और ‘डील’ से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम से जहां एक तरफ तीमारदार और मरीज कूलर की ठंडी हवा पाकर राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उठ रहे गंभीर सवालों ने स्वास्थ्य विभाग को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।





